“ख़त”

मन की खाली स्लेट पर मैनें
तुम्हारे नाम एक खुला ख़त लिखा है
तुम्हारा मंद हास और आँखों का नूर
मेरे मन के खाली कैनवास  को
वासन्ती फूलों से ढक देता है
तुम्हारी दूरी मन में खालीपन और
सांसों में बोझिलपन भर देती है
वक्त जैसे थम सा जाता है और
मेरी सोचों का दायरा बस तुम्हारे
इर्द-गिर्द  ही सिमट कर रह जाता है
क्या करूं —  मेरे जीवन की डोर
बस तुम्ही से बँधी है और तुमसे.
दूरी के अहसास से  मेरे मन में
बोझलपन और विचारों में रिक्तता भरी है ।

XXXXX

“मीना भारद्वाज”

14 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 04/03/2017
    • Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 04/03/2017
  2. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 04/03/2017
    • Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 04/03/2017
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 04/03/2017
    • Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 04/03/2017
  4. Kajalsoni 04/03/2017
    • Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 04/03/2017
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 04/03/2017
    • Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 04/03/2017
  6. C.M. Sharma babucm 06/03/2017
  7. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 07/03/2017
  8. ALKA ALKA 23/03/2017
    • Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 24/03/2017

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