मधुमास — डी के निवातिया

स बा

धुमा में
फिखेलेंगे
होली हम
 तेरी यादो संग  
मोतियों से भी
बेशकीमती
बनमी
अश्रु जल में
घुले होंगे
अनेको अनूठे रंग
कुछ प्रेम के,
कुछ क्रोध के
नारागी संग,
कुबन के  
हास परिहास
संग उपहास के
शाधुंधला जाये
ह्रपर लगी
उस छाप को
जो तकमकती है
सुनहरे रं में
हका जाती है
मेरे तन बद को
पने बासंती
मधुमास से !

!

!

—:: डी के निवातिया ::—

12 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 28/02/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 07/03/2017
  2. C.M. Sharma babucm 28/02/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 07/03/2017
  3. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 28/02/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 07/03/2017
  4. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 28/02/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 07/03/2017
  5. Madhu tiwari Madhu tiwari 28/02/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 07/03/2017
  6. Kajalsoni 01/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 07/03/2017

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