फिर दस्तक देती है मस्ती मेरे दिल के गांव में – मनुराज वार्ष्णेय


फिर दस्तक देती है मस्ती मेरे दिल के गांव में
छोड़ गमो की सड़कों को मैं लेटा आनंद की छाव में
बहुत तड़पा हूँ प्यार में पड़कर क्या क्या मुझसे छूटा है
घर द्वार पद सब छूट गया शतरंजी प्यार के दाव में

8 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 27/02/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 27/02/2017
  3. Kajalsoni 27/02/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 27/02/2017

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