“मन”………. काजल सोनी

मन की बातें मन ही जाने ,
कोई और समझ न पाये ।
कभी तन्हा ,
कभी गुमसुम बैठे ,
कभी तितली बन उड़ जाये ।

…… देख परिंदों की हलचल ,
…… बच्चों के संग बच्चा बनकर ,
…… खुशियों की ये मस्ती में नाचे,
…… कभी शोर इसे न भाये ।

लगे यू महीनों न नहाऊँ ,
कभी छत से टपकती बारिश में ,
तर तर भीग जाये ।

……. कभी रुसवा ,
………कभी पागल बन कर
……… मोहब्बत ये बरसाये ।

खाने को कुछ जी न लागे ,
संग यारों के कभी बैठकर,
जुठा भी छीन छपट कर खाये ।

…….. कभी ये गम की आग में जलता ,
…….. देख तरसता,
……… और मचलता ,
………कभी खुद ही समहल ये जाये ।

मन की बातें मन ही जाने ,
कोई और समझ न पाये । ।

” काजल सोनी “

26 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 25/02/2017
    • Kajalsoni 27/02/2017
  2. mani mani 25/02/2017
    • Kajalsoni 27/02/2017
  3. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 25/02/2017
    • Kajalsoni 27/02/2017
  4. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 25/02/2017
    • Kajalsoni 27/02/2017
  5. subhash 26/02/2017
    • Kajalsoni 08/03/2017
  6. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 26/02/2017
    • Kajalsoni 27/02/2017
  7. vijaykr811 vijaykr811 26/02/2017
    • Kajalsoni 27/02/2017
      • Kajalsoni 27/02/2017
  8. sumit jain sumit jain 26/02/2017
    • Kajalsoni 04/03/2017
  9. babucm babucm 27/02/2017
    • Kajalsoni 27/02/2017
  10. subhash 27/02/2017
  11. subhash 27/02/2017
    • Kajalsoni 04/03/2017
  12. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 27/02/2017
    • Kajalsoni 28/02/2017
  13. Prince Seth Prince Seth 21/03/2017
    • Kajalsoni 22/03/2017

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