ग़ज़ल-नाम से तेरे ग़ज़ल लिख रहा हूँ-मनिंदर सिंह “मनी”

नाम से तेरे ग़ज़ल लिख रहा हूँ |
बस खुदा का मैं फज़ल लिख रहा हूँ ||

देख तुझ को हमनवां जीने लगा मैं |
दिल का अपना ही खलल लिख रहा हूँ ||

हैं बसी धडकन में मेरी हमसफर तू ।
धड़कता दिल आजकल लिख रहा हूँ ।।

डूब जाऊ झील सी आँखों में बालम |
तेरी आँखों को सजल लिख रहा हूँ ||

रेशमी जुल्फे तेरी झूमे हवा में |
इन हवाओ में वकल लिख रहा हूँ ||

हो न जाना तुम खफा दिलबर “मनी” से,
बैठ कर रब का फज़ल लिख रहा हूँ ||

मनिंदर सिंह “मनी”

6 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 24/02/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/02/2017
  3. Kajalsoni 24/02/2017
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/02/2017
  5. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 24/02/2017
  6. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 24/02/2017

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