महादेव—डी के निवातिया


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पाप पुण्य के युद्ध में जो खुद को मिटाता है।
त्याग कर अमृत हलाहल विष अपनाता है।
निस्वार्थ लोकहित में जीवन अर्पण कर दे।
वो स्वयंशंभू, नीलकंठ, महादेव कहलाता है ।।

हर हर महादेव, जय भोले भंडारी

इस जग में तेरी लीला सबसे न्यारी।।

 




डी. के. निवातिया।।

 

10 Comments

  1. babucm babucm 24/02/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 28/02/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 24/02/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 28/02/2017
  3. Kajalsoni 24/02/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 28/02/2017
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/02/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 28/02/2017
  5. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 24/02/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 28/02/2017

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