उठ गया

जाने क्यों कायनात से,भरोसा अपना उठ गया
लगता है हमदर्द कोई, हमसे कहीं तो रुठ गया
बांधा था बड़ी मुश्किल से नेह डोर को जिनसे
पता चला न कौन से झटके मे वह टूट गया
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मधु तिवारी

8 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 23/02/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 24/02/2017
  3. C.M. Sharma babucm 24/02/2017
  4. Kajalsoni 24/02/2017
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/02/2017
  6. Madhu tiwari Madhu tiwari 25/02/2017

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