“क्षणिकाएँ”

( 1 )
कागज़ और कलम का रिश्ता
जब भी जुड़ता है , जीवन को एक अर्थ देता है ।
कभी यह बड़ा नामचीन  तो कभी
बड़ी गुमनामी झेलता है ।

( 2 )
आज कल हर तरफ
मछली बाजार  सा सजा है ।
कान फोड़ू शोर कायम है
और काम की बात ही गायब है ।

   ( 3 )
मन ने आज कुछ नया करने की ठानी है ।
अर्द्ध चन्द्र को धरती पे ला  और उसकी नौका बना ।
उफनते समुन्दर में कश्ती चलानी है ।

XXXXX

“मीना भारद्वाज”

14 Comments

  1. mani mani 23/02/2017
    • Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 23/02/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 23/02/2017
    • Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 23/02/2017
  3. Kajalsoni 23/02/2017
    • Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 23/02/2017
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/02/2017
    • Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 23/02/2017
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 23/02/2017
  6. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 24/02/2017
  7. C.M. Sharma babucm 24/02/2017
  8. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 24/02/2017
  9. ALKA ALKA 23/03/2017
    • Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 24/03/2017

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