मन मेरा इत उत भागे रे….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

मन मेरा इत उत भागे रे….
उड़ जाए बदली बन कभी…
कभी चाँद सा झांके रे….

जंगल में सबने क़ानून बनाया…
दुश्मन भी जिसने दोस्त बनाया…
बिल्ली मौसी के घर शादी…
चूहा दूल्हा बन नाचे रे….
मन मेरा इत उत भागे रे….

भालू भी दावत में आया….
आलू और टमाटर खाया…
पेट उस का भर न पाया….
फिर भी थैंक्यू बोला रे……
मन मेरा इत उत भागे रे….

शेर दहाड़ न मारे अब…
पेट में उसके पडते बल…
शेरनी बनाये खाना अब…
और लगाए लिपस्टिक रे…..
मन मेरा इत उत भागे रे….

लोमड़ी चाची नाक सिकोड़ती…
घूमें इधर उधर मटकती…
या पढ़ती फिर बैठ पोथी…
बातों में उसकी कोई न आये रे…..
मन मेरा इत उत भागे रे….

बन्दर मियाँ खी खी करते…
खजूर के पेड़ पे पड़े हैं लटके…
बच्चों को अब वो खूब हंसाये…
केले उनके नहीं खाये रे…..
मन मेरा इत उत भागे रे….

गिलहरी फुदके इधर उधर..
तोता मैना बैठे जिधर…
हाथी पे बैठ कुत्ता जाए…
‘चन्दर’ मन सब भाये रे…..
मन मेरा इत उत भागे रे….
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/सी. एम्. शर्मा (बब्बू)

12 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/02/2017
    • C.M. Sharma babucm 25/02/2017
  2. Kajalsoni 23/02/2017
    • C.M. Sharma babucm 25/02/2017
  3. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 23/02/2017
    • C.M. Sharma babucm 25/02/2017
  4. Madhu tiwari Madhu tiwari 23/02/2017
    • C.M. Sharma babucm 25/02/2017
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 23/02/2017
    • C.M. Sharma babucm 25/02/2017
  6. mani mani 23/02/2017
    • C.M. Sharma babucm 25/02/2017

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