विरह गीत

वो तेरी हर मुलाकाते
अब मुझे रूलाती है
वो तेरी हर बाते
अब मुझे सताती है
सोचता है दिल मेरा
छोडु ये ज़िंदगी
पर माँ-बाप की वो मेहनत
मुझे याद आती है
वो तेरी हर मुलाकाते
अब मुझे रूलाती है
ऐ बेदर्द तुने ये
दिल मेरा तोडा है
हो शायद कमी मुझमे
जो रिस्ता गैरो से जोडा है
मै आज हू तन्हा
तेरी छवि जलाती है
वो तेरी हर मुलाकाते
अब मुझे रूलाती है
है इतना विश्वास मैने
तुमपे क्यो किया
सब तोड़ के ये बंधन
सब-कुछ लुटा दिया
मुझे खुद से ही अब
नफ़रत सी लगती है
वो तेरी हर मुलाकाते
अब मुझे रूलाती है
याद मे तेरी अब
दिन रात तड़पता हू
तेरी बेवफाई से
रोज दुखो से नहाता हू
लिखता हू कलम से कुछ
लिख तु ही जाती है
वो तेरी हर मुलाकाते
अब मुझे रूलाती है

12 Comments

  1. Kajalsoni 22/02/2017
  2. Krishan saini कृष्ण सैनी 22/02/2017
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/02/2017
  4. Krishan saini कृष्ण सैनी 23/02/2017
  5. C.M. Sharma babucm 23/02/2017
    • Krishan saini कृष्ण सैनी 23/02/2017
  6. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 23/02/2017
    • Krishan saini कृष्ण सैनी 23/02/2017
  7. mani mani 23/02/2017
    • Krishan saini कृष्ण सैनी 23/02/2017
  8. Madhu tiwari Madhu tiwari 23/02/2017
  9. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 23/02/2017

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