गुब्बारों का लगा है मेला

गुब्बारों का लगा है मेला।
एक रुपए में ले लो जैसा।
लाल,गुलाबी,नीला,पीला।
पैसे लेकर दौड़ी शीला।
माँग लिया गुब्बारा नीला।
इधर से डोला- उधर से डोला।
श्यामू,चिंटू,सीता,लीला।
खेल सभी ने मिलकर खेला।
चीख उठी तब उधर से शीला।
मेरा छूट गया गुब्बारा नीला।
श्यामू डोर पकड़ जब डोला।
उधर से डोला-इधर से डोला।
खेल गुब्बारों से ही था खेला।
गुब्बारे वाले का नाम छबीला।
आठ रंग का कुरता ढ़ीला।
गुब्बारे वाला तब उधर से बोला।
गुब्बारों का भेद जब खोला।
टूट डोर जब जायेगी शीला।
हाथ लगे न कुछ फिर सीता।
तुमने इसे दबाया लीला।
खेल रुक चले सभी का।
गुब्बारों का खेल ही ऐसा।
देखो लगा हुआ है मेला।
                        सर्वेश कुमार मारुत

3 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 20/02/2017
  2. babucm babucm 21/02/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 21/02/2017

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