एहसास-ऐ-गैर — डी के निवातिया

मुहब्बत के नाम का पाठ वो दिन रात रटता है।
जरा सा छेड़ दो तो ज्वालामुखी सा फटता है।।
क्या हालात हो गये आज दोस्ताना-ऐ-जहाँ के
जिसे मानो अपना एहसास-ऐ-गैर दिला के हटता है।।

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—::डी के निवातिया::—

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16 Comments

  1. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 22/02/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 25/02/2017
  2. C.M. Sharma babucm 22/02/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 25/02/2017
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 22/02/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 25/02/2017
  4. कृष्ण सैनी कृष्ण सैनी 22/02/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 25/02/2017
  5. Kajalsoni 22/02/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 25/02/2017
  6. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 22/02/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 25/02/2017
  7. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/02/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 25/02/2017
  8. mani mani 23/02/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 25/02/2017

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