हाल ए दिल – शिशिर मधुकर

करो तुम कड़ा पहरा और जुल्मों की बरसाते
मुहब्बत के खुदा पर कभी दिल से नहीं जाते

कोई तो बात होती है दो जन नजदीक आते हैं
सब मिलने वाले तो नहीं निज सांसों में समाते

अगर जालिम ज़माने सा मेरा महबूब भी होता
उल्फ़त की सब कसमें फिर हम भी ना निभाते

चोट के दर्द का उनको जरा एहसास भी होता
ज़माने वाले पत्थर मार के ना औरों को सताते

भीड़ में रह कर भी जिनको तन्हाई मिलती है
तुम ही कहो वो हाल ए दिल किस को सुनाते

पत्थर की मूरत में भी मधुकर जो देवता होता
पाक श्रद्धा के फूलों को तब हम उसपे चढाते

शिशिर मधुकर

10 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 19/02/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/02/2017
  2. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 19/02/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/02/2017
  3. C.M. Sharma babucm 20/02/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/02/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 20/02/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/02/2017
  5. Kajalsoni 22/02/2017
  6. Kajalsoni 22/02/2017

Leave a Reply