बिटिया रानी…..चली गयी –डी. के. निवातिया

(यह रचना बिटिया की विदाई के बाद घर में उपजे माहौल पर प्रकाश डालती है, इसका पूर्ण आनंद लेने के लिए ह्रदयतल की गहराइयो में उतर कर रसास्वादन करे )

बिटिया रानी…..चली गयी

जिस रोज़ से बिटिया रानी,
तू बाबुल आँगन छोड़ चली गयी,
मिलन को तरस रहे है नैना,
क्यों बाबुल से मुख मोड़ चली गयी,
अति हुई है अब तो आजा,
प्यासी आँखे द्वारे टिकी रहती है !!

निर्झर बरसते है हम सब के नैना, कपोलो पे जल धारा बहती है !
घुमड़-घुमड़ उमड़े मन बदरा, बिटिया जब याद तुम्हारी आती है !!

सूना पड़ा है कोना कोना ,
घर में नजर न रौनक आये
तेरे बंचपन कि अठखेलिया,
रह-रह पागल मन को सताये,
आस लगी है तेरे मिलन की,
हर पल तू ही खयालो में रहती है !!

निर्झर बरसते है हम सब के नैना, कपोलो पे जल धारा बहती है !
घुमड़-घुमड़ उमड़े मन बदरा, बिटिया जब याद तुम्हारी आती है !!

पूछते है ये दर और दीवारे,
अब तो धूमिल हुई है तेरी किताबे,
चुनर लटकी एक कोने में,
तेरे आँचल पे सवरने को ललचाती है,
कब आयेगी मेरी लाडली,
घर की एक चीज़ मुझसे ये कहती है !!

निर्झर बरसते है हम सब के नैना, कपोलो पे जल धारा बहती है !
घुमड़-घुमड़ उमड़े मन बदरा, बिटिया जब याद तुम्हारी आती है !!

रसोई में रहता है सूनापन,
कुटिया में खामोशी छायी रहती है
वो चिड़िया भी नित आती आँगन
चीं चीं कर तेरे ही नाम को रटती है,
सदा करे बस सवाल एक ही,
मेरी सहेली से मिलवा दो ,कहकर उड़ जाती है !!

निर्झर बरसते है हम सब के नैना, कपोलो पे जल धारा बहती है !
घुमड़-घुमड़ उमड़े मन बदरा, बिटिया जब याद तुम्हारी आती है !!

बात करता हूँ तस्वीरो से
मगर आवाज न उनसे तेरी आती है
धुंधला पड़ा आईना कोने में,
जब देखूं तेरी परछाई नजर आती है,
मत तरसा लाडली अब तो आजा,
क्यों बूढी आँखों को तड़पाती है !!

निर्झर बरसते है हम सब के नैना, कपोलो पे जल धारा बहती है !
घुमड़-घुमड़ उमड़े मन बदरा, बिटिया जब याद तुम्हारी आती है !!

छुटकी भी अब हुई सयानी,
जो पहले बात बात पर तुझे सताती थी,
अब धीर गंभीर करती बाते,
जिसकी हँसी से ये कुटिया गुंजयाती थी
लगने लगी है अब बड़ी अबोध
जाने क्यों वो भी गुमसुम सी रहती है !!

निर्झर बरसते है हम सब के नैना, कपोलो पे जल धारा बहती है !
घुमड़-घुमड़ उमड़े मन बदरा, बिटिया जब याद तुम्हारी आती है !!

तख़्त पे बैठी बूढी मैय्या ,
हर आहट पे नाम तेरा बुलाती है
जिगर तो तेरे संग गया
अब निर्जर देह प्राणों से लड़ती है
अब कैसे उसको समझाऊ,
बिटिया नही रही अब तेरी, वो तो हुई पराई है !!

निर्झर बरसते है हम सब के नैना, कपोलो पे जल धारा बहती है !
घुमड़-घुमड़ उमड़े मन बदरा, बिटिया जब याद तुम्हारी आती है !!

***

—::   डी. के. निवातिया   ::—

24 Comments

  1. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 09/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 14/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 14/03/2017
  2. Rajeev Gupta Rajeev Gupta 09/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 14/03/2017
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 14/03/2017
  4. Kajalsoni 09/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 14/03/2017
  5. Madhu tiwari Madhu tiwari 09/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 14/03/2017
  6. C.M. Sharma babucm 09/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 14/03/2017
  7. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 10/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 14/03/2017
  8. आलोक पान्डेय आलोक पान्डेय 10/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 14/03/2017
  9. Shyam Shyam tiwari 12/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 14/03/2017
  10. Chanchal soni 20/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 20/03/2017
  11. KaviKrishiv KaviKrishiv 20/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 21/03/2017

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