राह दिखाओ—मधु तिवारी

कहते हो तुम प्रेम दिवस,
वेलेनटाइन डे आज है
सदियों से भारत मे अपना
पूरा ही ऋतुराज है

एक दिन को चिन्हित कर
अमर हुए विदेशी संत
प्रेम का एक ऋतु देकर भी
लुप्त हुआ प्यारा बसंत

मात पिता का दिवस मनाने
किया था जो संकल्प
पर देखो आज यह भी
बन गया है बस विकल्प

कैसा प्रेम कैसा बसंत
कोई जान न पाया है
वेलेंटाइन बस वेलेंटाइन
चारो ओर यही छाया है

मातृ पितृ दिवस का भी
कोई भी औचित्य नहीं
प्रेम मगन तरुण तरुणी को
लगता है बस यही सही

प्रेम भी सस्ता हो चला
वासना मे बदल गया
त्याग समर्पण का तो बस
नाम ही मे चल गया

नीली छतरीवाले ! देखो
तेरी धरा क्या हो रहा
आकर राह दिखाओ वर्ना
भारत का गौरव खो रहा

मधु तिवारी

10 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 14/02/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 14/02/2017
  3. mani mani 14/02/2017
  4. Madhu tiwari Madhu tiwari 14/02/2017
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/02/2017
  6. Madhu tiwari Madhu tiwari 14/02/2017
  7. babucm babucm 14/02/2017
  8. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 14/02/2017
    • Madhu tiwari Madhu tiwari 15/02/2017

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