एहसास ए मुहब्बत – शिशिर मधुकर

तुमसे कैसे कहें हम तुमको कितना याद करते हैं
एहसास ए मुहब्बत क्या कभी चाहने से मरते हैं

गमों की खाई से तुमने ही तो हमको निकाला था
तुम्हारा नाम जप जप के ही हम सजते संवरते है

जवानी आती है सबको पर इसका क्या करे कोई
फूल उल्फ़त के खिलने से ही तो चेहरे निखरते हैं

इस जीवन को जिसने भी यहाँ व्यापार समझा है
साँझ होने पर ऐसे लोग अक्सर तन्हा विचरते है

खुदा का नाम लेने से वो सबको मिल नहीं जाता
कोई तो बात होती है जो सब फिर भी सिमरते हैं

शिशिर मधुकर

8 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 14/02/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/02/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 14/02/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/02/2017
  3. C.M. Sharma babucm 14/02/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/02/2017
  4. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 14/02/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/02/2017

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