भारत मेरा देश सलोना आगे बढने का कम यंहा कोना ~Gursevak singh pawar

दोस्तो यह मेरी नई कविता उन यवाओं की स्थिति बताती है जो आज युग मे भी आगे नही बढ़ पा रहे आज के इस टेक्नोलॉजी के युग में भी हम पीछे की बाते करते रहते है और भ्रष्टाचार जैसी बीमारी ने हमारे एक सलोने देश को खोखला सा कर दिया है सो दोस्तों पेश इन्ही बातों को समझाती मेरी यह कविता……………..

भारत मेरा देश सलोना आगे बढने का कम यंहा कोना,
भारत मेरा देश सलोना,
लडकियों को दबाए रखते है,
लडको का भी यही है रोना,
भारत मेरा देश सलोना आगे बढने का कम यंहा कोना,
बच्चे जब प्रश्न पूछते,
माँ-बाप को भी पड़ जाता खोना,
की हम सब सही या सचा है बच्चों का रोना,
भारत मेरा देश सलोना आगे बढने का कम यंहा कोना,
भारत मेरा देश सलोना,
अपनों का जब पराये होना,
दूसरों का जब हम थामें कोना,
और फिर कहें ये लोग सब,
की देश को पीछे करता है यवाओं का लालच में खोना,
अरे भारत मेरा देश सलोना आगे बढने का कम यंहा कोना,
भारत मेरा देश सलोना,
नैतिकता पर प्रश्न उठाए,
पढने वालो चलो तुम ही बता दो,
क्या हल है सच झूठ का होना,
भारत मेरा देश सलोना आगे बढने का कम यंहा कोना,
भारत मेरा देश सलोना,
अरे में भी हूँ इस देश का हिस्सा,
पर सुनाता हूँ हर सच्चा किस्सा,
गुरसेवक का भी यंही पर खोना,
क्या भारत एक देश सलोना,
क्या भारत में मिलता है आगे बढने का कोना……?
~ Gursevak singh pawar

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