मैं आहत होती हूं—मधु तिवारी

मैं आहत होती हूं बेटियों पर जुल्म समाचार से
अपने गैरो से जुझने औऱ होते दो चार से

मैं आहत होती हूं ग ऊ पे अत्याचार से
होते दुर्दशा से और पड़ते बीमार से

मैं आहत होती हूं पिल्ले की चित्कार से
कराहते पीड़ा से दर्द भरे पुकार से

मैं आहत होती हूं पक्षी के क्रंदन से
घोंसला उजड़ने से उनके मौन रुदन से

मैं आहत होती हूं फैले कहीं भी कचरे से
दूसरों पर थोपने से होते हुए झगड़े से

मैं आहत होती हूं व्यर्थ बहते पानी से
घोर लापरवाही से न होते निगरानी से

मैं आहत होती हूं तेज वाहन रफ्तार से
होते हुए टक्कर से मौत के कगार से

मैं आहत होती हूं बाहर जाते शौच से
गुटखा चबाने से थूकते बेखौफ से

मधु तिवारी

14 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/02/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 10/02/2017
  3. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 10/02/2017
  4. Kajalsoni 10/02/2017
  5. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 10/02/2017
    • Madhu tiwari Madhu tiwari 10/02/2017
  6. babucm babucm 11/02/2017
    • Madhu tiwari Madhu tiwari 11/02/2017

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