फिरोजाबाद की गलियाँ देखो, यूपी की रंग-रलियाँ देखो,….~Gursevak singh pawar

फिरोजाबाद की गलियाँ देखो,
यूपी की रंग-रलियाँ देखो,
चन्द्रमा की रोशनी की ठंडक से भी ठंडा न होता,
वहां का जीवन,
लोगो का वो सुहाग बनती,
अपने आप को है जलती,
अरे फिरोजाबाद की गलियाँ देखो,
यूपी की रंग-रलियाँ देखो !!
बच्चे भी है माँ के साथ जाते,
पढने को वे तरस जाते !!
तपते-तपते वे खत्म हो जाते,
अरे फिरोजाबाद की गलियाँ देखो,
यूपी की रंग-रलियाँ देखो !!
अंधेरी सी है वहां की जिन्दगी,
पर प्रकाश भी आता, है झुल्स्ती आग का,
आग में बैठे बच्चे जल जाते,
लोगों के लिये चूड़ियाँ बनाते,
फिरोजाबाद की गलियाँ देखो,
यूपी की रंग-रलियाँ देखो !!
बच्चे के अगर खरोच भी आती,
तो माँ दौडी-भागी आती,
बच्चो को वहां कौन बचाता,
झुल्स्ती आग में वह मर जाता,
बाल मजदूरी कर बच्चों का जीवन खत्म हो जाता,
फिरोजाबाद में उन्हें कौन बचाता,
अरे! फिरोजाबाद की गलियाँ देखो,
यूपी की रंग-रलियाँ देखो !!
जरा ध्यान से सुनिए अखिलेश यादव जी,
बच्चो औरतों की दुहाई,
इनको दो जीवन की कोई दवाई,
फिरोजाबाद की आग को देखो,
यूपी के आप भाग को देखो,
गुरसेवक सिंह ये लिख कर बतलाता,
फिरोजाबाद को राहत पहुंचाता,
अरे! फिरोजाबाद की गलियाँ देखो,
यूपी की रंग-रलियाँ देखो !!….
~गुरसेवक सिंह पवार जाखल

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 10/02/2017
  2. gursevak singh pawar jakhal guirsevak 10/02/2017

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