ए-रूबरू जिंदगी क्या बुनियाद तेरी… ~ Gursevak singh pawar

रूबरू ए-जिंदगी क्या बुनियाद है तेरी,
कंहा से तू शुरू हुई, कहाँ पर ले जाएगी !!
बचपन में तू शुरू हुई, बुढ़ापे में ले जाएगी,
साथ तेरा है झूठा, कब तू क्या कर जाएगी !!

झूठ की बुनियाद पर, तू ऐसे ही कट जाएगी,
एक दिन सचाई को, तू हमारे पास ले आएगी !!
मौत बन कर तू, हमे ऐसे ही छोड़ जाएगी,
रूबरू ए-जिंदगी क्या बुनियाद है तेरी !!

बचपन से उठा कर, पैसे में फँसा कर,
हमे गलत रस्ता दिखाएगी !!
जवानी में हमे पैसे की गुलाम बनाएगी,
और बुढ़ापे में हमें कमिया हमारी दिखाएगी !!
कि जिंदगी को ऐसे ही गवा डाला,
तू अपने मुँह से सुनाएगी !!

ए-रूबरू जिंदगी क्या बुनियाद तेरी,
गुरसेवक अपनी जुबान सुनाता !!
ऐसे किसी को न भटकाता,
भटकते को उसका रास्ता दिखाता !!
और अपनी कलम को चलाए जाता,
लोगो के कानो तक आवाज पहुंचाता !!
और कहता जाता कि –
ए-रूबरू जिंदगी क्या बुनियाद तेरी,
ए-रूबरू जिंदगी क्या बुनियाद तेरी !!
~गुरसेवक सिंह पवार जाखल

One Response

  1. babucm babucm 11/02/2017

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