मेरा- मेरा सब कहे – डी. के. निवातिया

कुण्डलिया

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मेरा- मेरा सब कहे , मैं  में  खोया देश !
दोष राखे सब दुसरे ,  लूटे भर के  भेष !!
लूटे भर के  भेष, समझ कोई  ना पाये !
भारी जब हो जेब, गाल पे लाली छाये !!
चोर उड़ाये मौज, कष्ट ने जन को घेरा !
हाथ कुछ नही फिर, सब कहे मेरा-मेरा !!

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डी. के. निवातिया

20 Comments

    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 29/03/2017
  1. babucm babucm 25/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 29/03/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 25/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 29/03/2017
  3. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 25/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 29/03/2017
  4. Kajalsoni 25/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 29/03/2017
  5. Shyam Shyam tiwari 25/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 29/03/2017
  6. आलोक पान्डेय आलोक पान्डेय 25/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 29/03/2017
  7. KaviKrishiv KaviKrishiv 25/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 29/03/2017
  8. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 26/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 29/03/2017
  9. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 26/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 29/03/2017

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