मेरा इज़हार

क्या मै इज़हार ऐ मोहब्ब्त करू
खुद ही बिखरी हुई हु
क्या तेरे दिल मै जगह बनाऊ
खुद ही टूटी हुई हू
सारी तारीफे मोहब्ब्त की हुई
पर केसे मै सबको बतलाऊ
बस एक अन्धेरा सा मुकाम है
सब उस मंजर से हैरान है
एक दर्दनाक जखम ने घर कर रखा है
यह शिकवा अब नासूर बन गया है
याद है तो अब सिर्फ चेहरे
वो रोने की आवाज़े
सांसे रोकना चाऊ
पर फिर ख्याल आता है
केसे एक पल काफी था
इस हसीं सफ़र को अंजाम देने के लिय
और सब कहते है मै इजहार करू
जब सब खत्म हो चूका है
मै केसे एक नई शुरुआत करू
अब कोई खवाइश नहीं इश्क की
केसे मै फिर तुजसे प्य़ार करू
मै डूब चुकी हु गहरइयो मे
केसे अब इस समंदर को पार करू मै
क्या मै इज़हार ऐ मोहब्बत करू।।।।।

14 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/02/2017
    • Shabnam Shabnam 08/02/2017
  2. babucm babucm 08/02/2017
    • Shabnam Shabnam 08/02/2017
    • Shabnam Shabnam 08/02/2017
  3. mani mani 08/02/2017
    • Shabnam Shabnam 08/02/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 08/02/2017
    • Shabnam Shabnam 08/02/2017
  5. ayush 09/02/2017
    • Shabnam Shabnam 11/02/2017
  6. Shakila Dayer 09/02/2017
    • Shabnam Shabnam 11/02/2017

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