दिल निकाल कर

इस इश्क़ की तू इक नई कायम मिसाल कर
कर बन्द मुझको दिल के तू पिंजरे में डाल कर
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है प्यार की कसम सनम तू यूँ तो कर नहीं
किस्मत का मेरी फैसला सिक्का उछाल कर
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दिल से जुड़ी है बात सुनूंगा मैं दिल से ही
गर चाहिए जवाब तो दिल से सवाल कर
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फ़रियाद सबकी है खुदा से इतनी सी ही बस
उसका तू कर न कर खुदा मेरा खयाल कर
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कर कर के याद बात जवानी की ए सनम
शरमा के अपने गालों को ऐसे न लाल कर
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लिक्खे थे जितने खत तुम्हे डाले न डाक में
रक्खें है मेरे पास वो अब भी संभाल कर
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बदनाम खुद को करके मेरा नाम हो गया
जीता है बाज़ी दिल की रजत दिल निकाल कर
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गुरचरन मेहता :रजत:

7 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/02/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 06/02/2017
  3. Kajalsoni 06/02/2017
  4. babucm babucm 07/02/2017
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 07/02/2017
  6. mani mani 07/02/2017

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