माथे का कुमकुम – शिशिर मधुकर

मेरी जिंदगी में सब कुछ छोड़ कर गर जो आते तुम
तुम्हारे मरमरी चेहरे की मय पी मैं रहता नशे में गुम

बड़ा वीराना रहता है मेरी मुहब्बतों का हसीन बाग
तुम आ जाते तो खिल जाते इसमें लाखों नए कुसुम

साज ए दिल से निकलती नहीं है कोई भी आवाज़
तुम क्यों नहीं बन जाते हो अब इसकी मीठी तरन्नुम

अपने दिल में बसाया है तो इस ज़माने से कैसा डर
सबको बता दो खुलकर मैं हूँ तेरे माथे का कुमकुम

मुहब्बत बिना इस दुनियाँ में आखिर कुछ न रखा है
जो करते हैं हरदम इसको यहाँ वो करते नहीं हैं जुर्म

शिशिर मधुकर

12 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 06/02/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/02/2017
  2. C.M. Sharma babucm 06/02/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/02/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 06/02/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/02/2017
  4. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 06/02/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/02/2017
  5. Kajalsoni 06/02/2017
  6. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 07/02/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/02/2017

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