एक मुलाक़ात….

एक मुलाकात______
क्या रिश्ता है तुझसे मेरा..
बता पाओगे मुझे ज़रा
क्या नाम दूँ…
कुछ तो कहो ज़रा
ना तुम जीवन साथी…
ना ही हो मेरे साथी…
फ़िर भी…हर पल तुम्हे
ही महसूस हूँ करती….
ऐसा होता है क्युँ…
नही जानती…
तुम्हे तो पता होगा
बताओ तो ज़रा..
क्या हर रिश्तें का नाम
होना है ज़रूरी….
कुछ नाम नही..पास मेरे.
की तुझे मै क्या कहूँ….
तुम खुद ही रख लो
कोई भी नाम ज़रा
हाथों में हाथ नही है
पर रूह में रूह घुली है
क़दम क़दम पर साथ नही
पर एहसासों में हर पल पास हो
फ़िर भी हूँ कहती..
तेरा मेरा कोई रिश्ता नही
अब तुम ही बताओ…….ज़रा
इस नेह को क्या नाम दूँ
बन्दगी कहूँ …..दीवानगी कहूँ
खुदा सा कहूँ….या खुदाई ,कहूँ..
पाकीजा सा रिश्ता..या
रूहानियत लिए सज़ा ये रिश्ता…….
मस्तानी कहूँ……..या श्रद्धा कहूँ..
माँगती है दुनिया हर रिश्तें का नाम
नही समझ पाती दुनियाँ
स्नेह… नेह से लिपटे सच्चे
रिश्तों का साथ ….
हो राधा के मोहन से
हो मीरा के श्याम से..
नही है आसान..
सार पाना इनका
फ़िर भी पवित्रता में
कोई कमी नही……
नही दें सकती
फ़िर भी नाम कोई
क्या कह कर पुकारू तुझे
तुम ही बताओ ज़रा…….
तेरे मेरे रिश्तें को क्या नाम दूँ…………
क्या रिश्ता है तुझसे.मेरा ………

5 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/02/2017
  2. C.M. Sharma babucm 06/02/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 06/02/2017
  4. Kajalsoni 06/02/2017

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