डायरी का दर्द

लिखता रहा जिस निष्कपट कलम की स्याही से
चीख उठी है आज वही बढ़ती दर्द की तबाही से
अचंभित हुआ हूँ दृश्य देखकर कैसी काली घटा ये छा गयी
आज ये डायरी दर्द से और कलम स्याही से कहर ढा गयी

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/02/2017
  2. babucm babucm 06/02/2017
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 06/02/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 06/02/2017
  5. Kajalsoni 06/02/2017

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