हो जाये चहु और उजाला ऐसा मुझको इक चिराग मिल जाये- मनुराज वार्ष्णेय

माँ अपने ईश्वर से मांगे मेरी राह में भी एक फूल खिल जाये
महकाये वो देश का दामन चाहे मेरी राह में शूल बिछ जाये
चमक जाये धरती का यौवन फिर सोने की चिड़िया बन जाये
हो जाये चहु ओर उजाला ऐसा मुझको इक चिराग मिल जाये

अत्याचार सहती हूँ फिर भी आशा का मैं दीप जलाती
दो पुत्री की माँ हूँ फिर भी दुनिया मुझको बाँझ बुलाती
कोई भी हित न मिलता बेटी को पुत्र ही सबको भाता है
पुत्री को पराया बतलाकर पुत्र चिराग बतालाया जाता है
मुझसे कष्ट सहे न जाते अब मेरी सारी पीड़ा मिट जाये
हो जाये चहु और उजाला ऐसा मुझको इक चिराग मिल जाये

हे ईश्वर मेरी बात तू सुन ले दे दे मुझको एक ऐसा बेटा
जो बेटे के संग बेटी को भी उतना सम्मान ही हो देता
गर्व करेंगे सोहर के पूर्वज ऐसा हो हर खानदान का वंशज
बोलेगी ये दुनिया उसको काँटों बिच खिल गया है पंकज
देश का गौरव बन जाये वो ऐसा उसको काम मिल जाये
हो जाये चहु और उजाला ऐसा मुझको इक चिराग मिल जाये

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 04/02/2017
  2. Kajalsoni 05/02/2017
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 06/02/2017

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