“हवाएँ”

हवाएँ नीरव सी फिज़ा में
निस्तब्ध पेड़ों की पत्तियों को
जब छू कर  गुजरती हैं तो
खामोशियाँ भी गुनगुनाती हैं ।

ये जब बाँस के झुरमुटों से
गुजरती  हैं तो बाँसुरी की
मादक  तान  बनकर
सांसों में घुल -घुल जाती है ।

समुद्र  की गिरती -उठती
लहरों से करती हैं अठखेलियाँ
कभी जलतरंग  बजाती तो कभी
नाहक शोर मचाती हैं ।

जीर्ण भग्नावशेषों से गुजरती ये
तन को सिहराती ना जाने कितनी
अनदेखी अनसुनी दास्तानों का जिक्र
अपनी उपस्थिति संग दर्ज़ करा जाती हैं ।

×××××

“मीना भारद्वाज”

12 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 04/02/2017
    • Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 04/02/2017
    • Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 04/02/2017
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 04/02/2017
  3. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 04/02/2017
  4. Kajalsoni 05/02/2017
  5. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 05/02/2017
  6. Madhu tiwari Madhu tiwari 06/02/2017
  7. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 06/02/2017
  8. ALKA ALKA 24/03/2017
  9. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 24/03/2017

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