हमेशा है वस्ल-ए-जुदाई का धन्धा

हमेशा है वस्ल-ए-जुदाई[1] का धन्धा
बुतों की है उल्फ़त ख़ुदाई का धन्धा

अगर बैठें रिन्दों[2] की सोहबत में ज़ाहिद[3]
तो दें छोड़ सब पारसाई का धन्धा

जो होना है आख़िर वो हो कर रहेगा
करे कौन बख़्त-आज़माई[4] का धन्धा

परेशां रही उम्र पर न छोड़ा
तेरी ज़ुल्फ ने कज-अदाई[5] का धन्धा

मुबारक रईसों को कार-ए-रियासत
गदा[6] को है काफ़ी गदाई[7] का धन्धा

नहीं ख़िज्र के पीछे गर और झगड़े
तो है साथ इक रहनुमाई का धन्धा

‘ज़फ़र‘ इस से बहतर है ना-आशनाई[8]
कि मुश्किल है ये आशनाई का धन्धा

शब्दार्थ:

  1. ↑ मिल्न और विरह
  2. ↑ शराबियों
  3. ↑ धर्म उपदेश
  4. ↑ भाग्य आजमाना
  5. ↑ टेढ़ापन
  6. ↑ भिखारी
  7. ↑ निर्धनता
  8. ↑ प्रेम न करना

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