दो पल कर लो प्यार प्रिये मेरा मुझ पर कोई अधिकार नही

पुरुस्कार कोई स्वीकार नही तुमसे बढ़कर कोई उपहार नही
जीना मारना कुछ भी तो नही तुमसे भिन्न कोई सार नही
हर रंग तुम्हारा स्वीकार मुझे कोई भी प्रतिकार नही
दो पल कर लो प्यार प्रिये मेरा मुझ पर कोई अधिकार नही

रूठ जाती हो अक्सर मुझसे दर्द बनाता दिल में आवास
कुछ भी तो सुखमय न लगता लगता है जीवन वनवास
तन मन सब दुखता है पीड़ा का पलड़ा भरी हो जाता
चीख उठता है सूक्ष्म दिल मेरा दर्द का कोई भी आकार नही
दो पल कर लो प्यार प्रिये मेरा मुझ पर कोई अधिकार नही

तुम आती तो रंग भर जाती हो बागों में फूल खिलाती हो
दर्द भी तड़प कर बोल पड़े तुम क्यों बीच में आ जाती हो
तड़पन पीर उदासी सब कहीं और डेरा जमा जाते है
तेरी उपस्थिति से मेरा इन सब से कोई भी संचार नही
दो पल कर लो प्यार प्रिये मेरा मुझ पर कोई अधिकार नही

5 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 02/02/2017
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 02/02/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 02/02/2017
  4. C.M. Sharma babucm 02/02/2017

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