मुँह जो फेरा है – शिशिर मधुकर

अपने हर अंश में तुम झाँक लो मेरा बसेरा है
वक्त के साथ में छंट जाएगा जो भी अँधेरा है

तुम्हे पाना मेरे लिए बस कुदरत की मर्जी थी
अगर तुम दूर हो मुझसे तो ये ना दोष मेरा है

मैं चलता रहा बेख़ौफ़ इस जीवन की राहों में
हर शख्स अब लगता यहाँ कातिल लुटेरा है

बड़ी शिद्दत से तिनके जोड़ मैंने घर बनाया था
मेरे जीवन के तूफां ने मगर सब कुछ बिखेरा है

है सब कुछ पास में मेरे मगर मन में उदासी है
उल्फ़त में इस किस्मत ने मुझसे मुँह जो फेरा है

शिशिर मधुकर

14 Comments

  1. Shabnam Shabnam 29/01/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 29/01/2017
  2. सोनित 29/01/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 29/01/2017
  3. C.M. Sharma babucm 29/01/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 30/01/2017
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/01/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 30/01/2017
  5. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 30/01/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 31/01/2017
  6. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 31/01/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 31/01/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/02/2017

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