मोहब्बत का सबसे बड़ा दुश्मन – मनुराज वार्ष्णेय

तेरे आने से दुश्मनी की जंजीरों में जकड चुका हूँ
ये दुनिया मिलने न देगी हमें ये बात समझ चुका हूँ
खुदा की रहमत का ही आसरा है अब तो क्योंकि
हिम्मत न होती आगे बढ़ने की अब मैं किनारा पकड़ चुका हूँ

2 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 29/01/2017
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/01/2017

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