मुस्कान

मुस्कान…

ऐसी है तेरी मुस्कान
मुरचित चेहरे पे
ला देती है जान
ऐसी है तेरी मुस्कान…

कोमल सी तुम्हारे गात्
जैसे किचड़ से निकल कर
मेरे ऑंगन मे
खिल-खिला रहे जलजात्

तेरी ऐसी मुस्कान सरोवर
जिसमें खिल-खिला रहा प्राण
जो तेरी मुस्कान को देखकर
पिघल जाए कठोर पाषाण
ऐसी है तेरी मुस्कान….

क्रोधित मुखड़ो को भी
किया कहे
जब देखे तु कनखी मार
और होती जब ऑखे चार
तब तेरी मनमोहित मुस्कान
सबौ कर देता छविमान
ऐसी है तेरी मुस्कान….

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4 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 28/01/2017
    • md. juber husain md. juber husain 29/01/2017
  2. C.M. Sharma babucm 29/01/2017
  3. vvbbvpwyaan 01/04/2017

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