चाँदी – शिशिर मधुकर

चाँदी को निज शक्ति का जो अहसास मिल जाए
बन्धन को सारे तोड़ कर वो खुद ही निकल जाए
अपनी ठंडक से वो हर जिंदगी के ताप को हर ले
हाथ थाम के उसका कितने टूटे दिल सँभल जाए

शिशिर मधुक

4 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 28/01/2017
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 28/01/2017
  3. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 30/01/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 31/01/2017

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