प्यार का नशा – मनुराज वार्ष्णेय

मेरे सपनों में आकर के मुझे पागल बनाती हो
मेरे मकसद को छुड़ाकर मुझे कायर बनाती हो
तेरी ही याद में खोकर मेरा सूरज ढलता है
तुम सच में प्यार करती हो या सिर्फ दिल को लुभाती हो
कवि- मनुराज वार्ष्णेय

2 Comments

  1. babucm babucm 27/01/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 28/01/2017

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