ढलती सी शाम – शिशिर मधुकर

ऐ दुनियाँ वालों तुमको यहाँ ना कोई काम है
प्रेम को रुस्वा कर ही तुम्हें मिलता आराम है
तुम क्यों ना समझते हो यही ईश्वर का रूप है
हर जिंदगी वरना यहाँ एक ढलती सी शाम है

शिशिर मधुकर

6 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 24/01/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/01/2017
  2. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 24/01/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/01/2017
  3. babucm babucm 25/01/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 25/01/2017

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