मेरी चाहत – शिशिर मधुकर

मेरी चाहत में कोई बात है जो दुनियाँ भी जलती है
मगर परवानो के मन से कभी ना आह निकलती है
घने सहरा की सूखी रेत में ना कभी फूल खिलते हैं
किसी की साँसों में बसने को ही खुशबू मचलती है

शिशिर मधुकर

10 Comments

  1. आनन्द कुमार ANAND KUMAR 22/01/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/01/2017
  2. C.M. Sharma babucm 23/01/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/01/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/01/2017
  3. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 23/01/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/01/2017
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 23/01/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/01/2017

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