बीता जाता है ये जीवन

छाया है तिमिर
चारो और
उदासीनता है
जीवन में
कही ग़म है तो
कही खुशियाँ है
कभी है धूप तो
कभी है छाँव
बीता जाता है
ये जीवन

जब जब में
खंगेलु जिंदगी के
पूर्व पन्नो को
आती है यादे
उमड़ उमड़ कर
जब जब सांसे
लगती है थमने
चमकता है प्रकाश
यादो का
बीता जाता है
ये जीवन

उड़ रहा है समय
पंख लगा कर
न पड़ाव है
न विश्राम है
हारेगा हर कोई
उसके सम्मुख
बलवान है समय
महान है वो
जो नाप पाए
उसकी रफ़्तार
बीता जाता है
ये जीवन

रुकावटें है कई
पथ के उद्गम में
बढ़ जाता है
पृथक करके
लक्ष्य है पाना
मंजिल को
बीता जाता है
ये जीवन

8 Comments

  1. Bolte Chitra 21/01/2017
  2. C.M. Sharma babucm 21/01/2017
    • sumit jain sumit jain 21/01/2017
  3. C.M. Sharma babucm 21/01/2017
    • C.M. Sharma babucm 21/01/2017
    • sumit jain sumit jain 21/01/2017
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 21/01/2017

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