प्रिय अब तुम वापस आ जाओ

प्रिय अब तुम वापस आ जाओ
अपने स्पर्श से मेरे इस दुर्बल ह्रदय के आघातों को भर जाओ
प्रेम सागर में डूबी कश्ती को अब तुम अपना सहारा दे जाओ
प्रिय अब तुम वापस आ जाओ

रूठ चुकी बहुत अब तुम मुझसे नाराजी को ख़त्म करो
सूनी पड़ी है बाहें मेरी तुम मुझ पर एक एहसान करो
सिमट रहा है मेरा दीपक चलती तेज हवाओं में
जलता रहे दीपक मेरा और तुम प्रेरणा स्रोत बन जाओ
प्रिय अब तुम वापस आ जाओ

मन मेरा बहुत चंचल है सूना इसका आँचल है
नजर न लग जाये मुझे किसी की तू ही मेरा काजल है
दुश्मन दिखते है मुझको सब कोई न प्यारा लगता है
नजरिया बदल जाओ मेरा तुम और ह्रदय में प्यार भर जाओ
प्रिय अब तुम वापस आ जाओ

आगे बढ़ने की कोशिश करता हूँ पर तेरी याद आ जाती है
तेरे साथ बिताये पलों की वो सारी तसवीरें छा जाती है
मेरे भविष्य तुम्हारे हाथों तुम ही हो इसकी निर्णायक
मेरी सफलता में साथी तुम हो ऐसा आश्वाशन दे जाओ
प्रिय अब तुम वापस आ जाओ

प्यार में कमीं न होगी कभी भी मैं तुमको वचन देता हूँ
जो भी तुमको कष्ट मिलेंगे उनको भी मैं सेहता हूँ
तनहा न होगी ज़िन्दगी में कभी भी ऐसा मेरा साथ है
तुम तो बस आकर के मेरे कश्ती की पतवार थाम जाओ
प्रिय अब तुम वापस आ जाओ

2 Comments

  1. babucm babucm 19/01/2017

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