अहा प्राण कहाँ !

हे मेरे भारत के लोग
कैसा दुःखद ये संयोग;
सह रहे जो आजतक वियोग,
क्या मिल पायेगा कोई सफल योग !
नहीं सफल योग मुस्कान कहाँ
जीवन जीने की जान कहाँ
सत्य की सुंदर अप्रतिम विधान कहाँ ;
वसुधा पर अहा प्राण कहाँ !

जय हिन्द !

5 Comments

  1. babucm babucm 16/01/2017
  2. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 16/01/2017
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 16/01/2017
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 17/01/2017

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