प्रेम प्रक्रण

तू नहीं भी होती है तो
तेरे होने का एहसास होता है
तेरे न होने पर बात ऐसे करता हूँ
जैसे तु मेरे साथ होता है
चाहे जीतना दूर हो जाओ
तेरा चेहरा मेरे पास होता है
चाहे हवा उलटी चले तेरी खुशबुओं का
टहलना मेरे पास होता है
तेरे गुजरने से तुम्हारे आहट का अहसास होता है
तु मुझसे कहीं खो न जाओ
दिल इस डर से उदास होता है

अजीब प्रेम प्रक्रण है दिल को चैन
कहाँ आता है
जुवां खामोश, दिल चुपचाप
जब तुम मेरे साथ होता है
दिल कई सपने संजोता है
जब तुम मेरे पास होता है
सपने टूट कर बिखर जाते हैं
जब दो धर्मों में टकरार होता है
सब कुछ भूल बफा के रश्मों को निभाता हूँ
इस आर्जु में
कि कभी प्रेम की बाते करता सुनूंगा कौम के
रहनुमाओं में
बस एक बार याद कर लेना जब
अमावश्या होता है
उस रात दिल तनहा-तनहा अकेला
सिर्फ अँधेरा साथ होता है।

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