क्यों याद रखूँ – अनु महेश्वरी

मैं जब पलटने लगी पन्ने ज़िन्दगी के किताब के
उसमे लिखें मिले कुछ खट्टे कुछ मीठे पल हर तरह के
फिर मैंने कुछ निश्चय किया………

जो पाया मैंने ज़िन्दगी में वो काफी है
फिर जो नहीं मिला उसे क्यों याद रखूँ?

खुशियों के पल इतने मिले मुझे
फिर उदासी के दो पल को क्यों याद रखूँ?

सुख के कितने हसीन दिन काटे हमने
फिर दुःख के कुछ पल को क्यों याद रखूँ?

अपनो के मीठे बोल है मेरे पास फिर
औरो के तीखे शब्दो को क्यों याद रखूँ?

अपनों से मिला प्यार और विश्वास मुझे
फिर किसी के अविश्वास को क्यों याद रखूँ?

मैंने किताब के पन्नो से बीती मीठी यादो को जिया
और मेरी ज़िन्दगी में एक उसूल को अपना लिया
याद रखो केवल वह पल
जो खुशियां दे
बुरी यादो वाले सारे पल
जेहन से मिटा दे।

 
अनु महेश्वरी

12 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 11/01/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 11/01/2017
  2. C.M. Sharma babucm 11/01/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 11/01/2017
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 11/01/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 11/01/2017
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/01/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 11/01/2017
  5. sumit jain sumit jain 12/01/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 13/01/2017
  6. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 13/01/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 13/01/2017

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