धूप सुनहरी – शिशिर मधुकर

तू ही है ग़म मेरा और तू ही खुशी मेरी
मैं खुद को भूला हूँ चाहत में एक तेरी

जिन्दगी जन्नत थी तेरी नज़रें करम से
दोजख बनी है जब से आँखे तूने फेरी

तुम मिले ज्यों मुझे उजाले हुए हर ओर
अब तो खत्म ना होती है ये रात घनेरी

हंगामा किया कुछ नें तो तुम दूर हो गए
अब तो लगे सारी दुनियाँ मुझको लुटेरी

मधुकर इस जहाँ में बैठा है खाली हाथ
जीवन में कब खिलेगी फ़िर धूप सुनहरी

शिशिर मधुकर

10 Comments

  1. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 11/01/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/01/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 11/01/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/01/2017
  3. C.M. Sharma babucm 11/01/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/01/2017
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 11/01/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/01/2017
  5. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 13/01/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/01/2017

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