नयी उड़ान

नई उड़ान
चलो बटोरें अवशेषों को,
फिर एक नई उड़ान भरें,
आज झुका दे अम्बर को भी,
अब ऐसी हुंकार भरें,

पाँव सम्भालें अपने हम,
अपने हांथ पकड़ ही खुद,
खुद का सहरा बन पाएं,
अब ऐसी दीवार बनें,

जल रहा सूरज आसमां मे,
जग को राह दिखाने को,
खुद को राह दिखा पाएं,
अब हम ऐसी आग बनें,

खड़े विटप समान हों,
गिरें तो झरना बन जाएं,
खुद को मंजिल तक पहुंचाएं,
अब हम ऐसी राह बनें।
जीवन निधि@पेज साहित्य की ओर

6 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 06/01/2017
  2. babucm babucm 06/01/2017
  3. mani mani 07/01/2017
  4. Madhu tiwari Madhu tiwari 08/01/2017
  5. कृष्ण सैनी कृष्ण सैनी 09/01/2017

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