चाहता हूँ

उड़ना चाहता हूँ
गगन तले
आजाद पंक्षी की तरह

बिखेरना चाहता हूँ
अपनी आभा
उदित सूर्य की तरह

चमकना चाहता हूँ
जग में
सितारों की तरह

बसना चाहता हूँ
ह्रदय में
यादों की तरह

छा जाना चाहता हूँ
जुबां पर
किसी तराने की तरह

समाना चाहता हूँ
अंधकार में
उजाले की तरह

महकना चाहता हूँ
चमन में
गुलों की तरह

जीतना चाहता हूँ
जंग-ए-जिंदगी
वीरों की तरह

6 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 06/01/2017
  2. mani mani 06/01/2017
  3. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 06/01/2017
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 06/01/2017
  5. कृष्ण सैनी कृष्ण सैनी 09/01/2017

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