कुछ साल बाद जब बुढ़ापा दस्तक देगा – अनु महेश्वरी

मेरी ज़िम्मेदारीयाँ कुछ कम होगी
तब भूलने की आदत सी बनेगी
लोगो के नाम, चेहरे शायद भूलने लगूँगी
न सुबह जल्दी उठने की ज़रुरत होगी
पर शायद आँखों से नींद ही गायब होगी
मैं अपनी ज़िम्मेदारीयों से थोड़ी मुक्त जो हो जाऊंगी।

बालों पे सफेदी की परत होगी
चेहरे पे झूरियां होगी
आखों पे सुन्दर सी ऐनक होंगी
बागवानी जीवन का हिस्सा बनेगी
पौधों से सुबह शाम बातें होंगी
मैं अपनी ज़िम्मेदारीयों से थोड़ी मुक्त जो हो जाऊंगी।

बरामदे में बैठ आकाश में उड़ते पक्षी को निहारा करुँगी
छुटियों में बच्चों के घर आने का इन्तजार करुँगी
कभी कभी पुराने ख़यालो में मैं खो जाऊंगी
अभी काम से फुर्सत नहीं मिलती
तब समय ही समय मेरे पास होगा
मैं अपनी ज़िम्मेदारीयों से थोड़ी मुक्त जो हो जाऊंगी।

कही भी आने जाने की आज़ादी होगी
न किसी से डरने की ज़रुरत होगी
शाम बागों में बीतने लगेगी
लौट के घर आने की जल्दी न होगी
मैं अपनी ज़िम्मेदारीयों से थोड़ी मुक्त जो हो जाऊंगी।

थोड़ी सी और सबल हो जाऊंगी
औरों की पीड़ा भी ज़्यादा महसूस करुँगी
जब अपना बिताया वक्त तब याद करुँगी
मैं शायद थोड़ी सी भावुक भी हो जाऊंगी
मैं अपनी ज़िम्मेदारीयों से थोड़ी मुक्त जो हो जाऊंगी।

 
अनु महेश्वरी
चेन्नई

14 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 05/01/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 05/01/2017
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 05/01/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 05/01/2017
  3. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 05/01/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 05/01/2017
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/01/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 05/01/2017
  5. babucm babucm 06/01/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 06/01/2017
  6. mani mani 06/01/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 06/01/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 08/01/2017

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