रोडलैंप””””””””सविता वर्मा

उस रोड लैंप की रोशनी में
धुंधलके सा तुम्हारी परछाई का दिखना
और मेरे हृदय का स्पन्दन
आन्तरिक अह्लादित ह्रदय खुश्बू जैसे चंदन
मन्त्र मुग्ध करता तुम्हारा सम्मोहन
और फिर मेरा तुम्हारी ओर बढना
तुम्हारा मेरी ओर कदमो को बढाना
कई बार भूल जाती अभिवादन
हृदय के स्पन्दन से होकर बेकल
पाव जब चलते हमारे साथ
मिल जाता ह्रदय को मुस्कान
मुस्करा उठता सारा आसमान
खिलखिलाता है उस पल को मेरा जहान
उस पलछिन को झोली में भर लेती हूँ मैं
क्योंकि वही पल थोड़ा सा जी लेती हूँ मैं
रूकते हो जब लड़खड़ा सी जाती हूं मैं
जाने के लिए कहोगे जान पाती हूँ मैं
बहुत कुछ जो चंद लम्हे पहले मिला
छुट जाता है
न जाने क्या क्या अन्तर्मन में टूट जाता है
रह जाता है ताकता वह रोडलैंप…………

8 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 01/01/2017
  2. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 01/01/2017
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 01/01/2017
  4. C.M. Sharma babucm 02/01/2017
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 02/01/2017
  6. mani mani 02/01/2017
  7. Saviakna Saviakna 20/01/2017

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