तृष्णा – शिशिर मधुकर

जो जगह मुझको दी तूने वहाँ किसको बसाया है
मेरी आँखों में तो अब तक तेरा मुखड़ा समाया है

मैं जन्मों का प्यासा हूँ तू जीवन दायिनी सुरसरिता
अपनी तृष्णा मिटाने को पथिक तेरे पास आया हैं

मुझे जिस नें भी दी कसमें और जो भी किये वादे
अपनी सब कसमें वादों को मैंने हरदम निभाया हैं

आज ठहरी हुई हैं जिंदगी और दिल में उदासी हैं
बदलते वक्त्त नें लेकिन यहाँ सभी को रूलाया हैं

शिकवे किसी से आखिर क्यों करता है तू मधुकर
जो किस्मत में है यहाँ तेरी वही झोली में आया है

शिशिर मधुकर

10 Comments

  1. babucm babucm 27/12/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 27/12/2016
  2. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 27/12/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 27/12/2016
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 27/12/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 27/12/2016
  4. निवातियाँ डी. के. निवातियाँ डी. के. 27/12/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 27/12/2016
  5. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 28/12/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 28/12/2016

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