पैरों में ज़ंजीरें – शिशिर मधुकर

इन पैरों में ज़ंजीरें हैं रिश्ते नातों की भारी
कह दो कैसे कर लूँ फ़िर मैं खोज तुम्हारी
तेरा प्रेम सचिदानंद सागर हैं एक अनोखा
बड़ी देर से समझ में आई हैं ये बात हमारी

शिशिर मधुकर

10 Comments

    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 26/12/2016
  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 26/12/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 26/12/2016
  2. C.M. Sharma babucm 27/12/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 27/12/2016
      • C.M. Sharma babucm 28/12/2016
        • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 28/12/2016
  3. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 28/12/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 28/12/2016

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