बस यादें

ज़िन्दगी गुज़र जाती है,
लम्हे बीत जाते हैं,
साथ रह जाती हैं,
बस यादें…

परछाइयाँ मिट जाती हैं,
अपने दूर कहीं चले जाते हैं,
कभी साथ नहीं छोड़ती,
बस यादें…

वसन्त के तरानों की तरह,
रिमझिम फ़ुहारों की तरह,
मन को लुभाती हैं,
बस यादें…

खामोशी में जैसे कभी,
कोई सुरीली सी तान छेड़ती,
सपनों की उड़ान को पर लगाती हैं,
बस यादें…

बबूल के पेड़ से जैसे,
झड़ पड़े हो शेफ़ालिका के फ़ूल,
ऐसा एहसास कराती हैं,
बस यादें…

सृष्टि में रह जाती हैं,
मौसम और ऋतुएँ बदलती,
सदाबहार होती हैं,
बस यादें…

तपती दुपहरी के बाद,
एक ठंडी सी आँह भरी हो धरा ने,
ऐसा सुकून देती हैं,
बस यादें…

बस यादें,
कभी ज़िन्दगी का हिस्सा,
तो कभी खुशियों का किस्सा,
कभी मस्तियों से वास्ता,
तो कभी ग़म से रिश्ता,
कुछ ऐसी ही होती हैं,
बस यादें…

10 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 25/12/2016
    • Ritu dadheech Ritu dadheech 25/12/2016
  2. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 25/12/2016
    • Ritu dadheech Ritu dadheech 25/12/2016
  3. babucm babucm 25/12/2016
    • Ritu dadheech Ritu dadheech 25/12/2016
    • Ritu dadheech Ritu dadheech 26/12/2016
  4. निवातियाँ डी. के. निवातियाँ डी. के. 26/12/2016
    • Ritu dadheech Ritu dadheech 27/12/2016

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